धार्मिक स्थल

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गाँव के उत्तर पश्चिम के कोने में एक विशाल नीम के वृक्ष के पास बना यह चौरा माता जी का मंदिर है | जो हमारे गाँव की ग्राम देवी है | प्रत्येक शुभ कार्य विवाह आदि का प्रारम्भ यहाँ दर्शन एवं पूजन करके ही किया जाता है |

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यह जीवित पुत्रिका माता जी का मंदिर माता मैया जी के मंदिर के पास में ही है | गाँव की महिलाये पुत्र की कामना के लिए व्रत रखकर यहाँ पूजन करती है |

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चकवैदिक मौजे के उत्तरी एवं पूर्वी कोने में स्थित यह भगवान रुपेश्वर महादेव जी का प्राचीन मंदिर है | लगभग ५०० वर्ष पूर्व पंडित राम रूप पाण्डेय जी द्वारा यहाँ शिव लिंग की स्थापना की गई | २००१ ईस्वी में सम्पूर्ण ग्राम वासियो द्वारा यहाँ मंदिर का निर्माण करवाया गया | इस मंदिर के सामने एक प्राचीन कुँवा भी है |

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भगवान शिव जी का यह मंदिर भी गाँव के मध्य में स्थित है | लगभग १५० वर्ष पूर्व स्व० पंडित जानकी मिश्र जी ने यहाँ शिव लिंग की स्थापना की | १९६७ ईस्वी० स्व० पंडित हरिवंश मिश्र जी के द्वारा मंदिर का निर्माण कराया गया | शिव भक्तो द्वारा यहाँ दर्शन व् पूजन किया जाता है |
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गाँव के मध्य में स्थित यह माता जी का प्राचीन मंदिर सम्पूर्ण हिन्दुओ के आस्था का केंद्र बिंदु है | यहाँ गाँव के सभी हिन्दू माता जी का दर्शन पूजन कर के ही अपने शुभ कार्य का प्रारम्भ करते है | नीम के एक प्राचीन वृक्ष के निचे चबूतरे पर स्थित इस मंदिर को हम माता मैया के नाम से पुकारते है|
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श्री हनुमत निकेतन बजरंग बली का यह प्राचीन मंदिर गाँव के उत्तर एवं पश्चिमी कोने पर स्थित है | १९५९ ईस्वी में पंडित राम नरेश मिश्र (वैद्य) के द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्वार करवाया गया | यहाँ प्रत्येक मंगलवार को सुन्दर कांड का पाठ किया जाता है | गाँव के सभी श्रद्धालु यहाँ बजरंग बली का दर्शन एवं पूजन करते है |
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गाँव का यह एक मात्र संतोषी माता जी का मंदिर है | २००९ ईस्वी में श्री ब्रह्मा नारायण मिश्र के द्वारा इस मंदिर की स्थापना की गई | इस मंदिर में संतोषी माता , भगवान शिव जी, भगवान गणेश जी एवं माता लक्ष्मी जी की मूर्ती की स्थापना की गयी है |